डा प्रवीण चोपड़ा
चिट्ठी मैं यहां शेयर नहीं कर सकता ...लेकिन वही बात है कि हर कागज़ जैसे बोलता है ... उसी तरह से वह चिट्ठी भी बोल रही थी, एक दम सधी हुई भाषा, बढ़िया सा पैड, बढ़िया टाइपिंग ...एकदम परफैक्ट, चिट्ठी के नीचे नाम के साथ भी एक बढ़िया सी स्टैंप और उस के साथ ही में दाईं तरफ़ अस्पताल की सील ...मैं उस चिट्ठी को देख कर यही सोच रहा था कि ऐसी चिट्ठीयां जहां भी जाती हैं उन्हें कोई कैसे इग्नोर कर सकता है ....such letters stand out of the whole bunch of letters! मैं उस वाट्सएप ग्रुप पर ही तारीफ़ करता करता रह गया जो कि ज़्यादा तारीफ़ में और चाटुकारिता में लाइन बड़ी महीन होती है .....इसलिए चुप बैठा रहा। लेकिन कुछ चिट्ठियां देखते ही पारखी लोगों को उन के पीछे बरसों की तपस्या समझते देर नहीं लगती।
लेकिन, वही हुआ जो मुझे लग रहा था ...अगले ही दिन किसी ने बीएमसी की तरफ़ से जवाब लिखा हुआ था कि आप को इंजेक्शन भिजवाएं जा रहे हैं.
यह वाक्या लिखने का मेरा मक़सद सिर्फ़ इतना है कि हम कहीं भी कोई चिट्ठी भेज रहे हैं तो उसे अच्छे से लिखें, अच्छे से पढ़ कर कोई भी गल्ती हो उसे सुधार लें..क्योंकि जिस के पास भी वह चिट्ठी जा रही है, आप उस के सामने मौजूद नहीं है, आप कितने भी प्रकांड विद्वान हैं, भाषा विज्ञानी हैं या कुछ भी हैं, उसने आप की शख्शियत का, आप के रूतबे का आंकलन आप के लिखे ख़त ही से कर लेना है ....हम अकसर सोचते हैं कि यार, सरकारी महकमों में ही तो जानी हैं चिट्ठी..क्या फ़र्क पड़ता है...लेकिन यही हमारी गलतफहमी है ... हर चीज़ का फ़र्क़ पड़ता है ... हर कागज़ बोलता है ...हमारी लिखी हुई चिट्ठीयां हमारी शख्शियत का आइना होती हैं...
इसलिए मेरा मशविरा यही है कि हर चिट्ठी को बड़ी संजीदगी से लें...वरना अर्थ का अनर्थ होते देर नहीं लगती ....हमने यह भी देखा है कि किसी अफसर की खराब इंगलिश की वजह से उसकी चिट्ठी ने अर्थ का अनर्थ कर डाला और केवल खराब इंगलिश की वजह से ही उस का शिकंजा ढीला पड़ गया....यह बात भी नहीं कि हमारी इंगलिश पर पकड़ परफैक्ट हो, लेकिन अगर हिंदी भाषा में भी कुछ लिखा जाए तो वह साफ-स्पष्ट और सटीक होना चाहिए....जो बात कहना चाह रहे हैं, सीधे सीधे कह कर बात को खत्म करें...इधर उधर की हांकना की ज़रूरत ही क्या है...और एक गल्ती कईं बार हम अपनी अच्छी इंगलिश का रौब डालने के लिए कुछ ऐसे अल्फ़ाज़ इस्तेमाल कर लेते हैं जिन के बारे मे हम खुद भी आश्वस्त नहीं होते ...इसलिए हिंदी हो या पंजाबी या मराठी हो या इंगलिश लिखते वक्त भी अपनी ज़ुबान को जितना हो सके बोलचाल वाली ही रखा जाए उतना ही अच्छा है...
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